श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 50: रावण का प्रहस्त के द्वारा हनुमान जी से लङ्का में आने का कारण पुछवाना और हनुमान् का अपने को श्रीराम का दूत बताना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.50.6 
मत्पुरीमप्रधृष्यां वै गमने किं प्रयोजनम्।
आयोधने वा कं कार्यं पृच्छॺतामेष दुर्मति:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मेरे दुर्जय पुरी में आने का उसका क्या प्रयोजन है? अथवा राक्षसों के साथ युद्ध करने का उसका क्या प्रयोजन है? ये सब प्रश्न इस मूर्ख वानर से पूछो।॥6॥
 
What is the purpose of his coming to my Durjay Puri? Or what is his purpose in starting a war with the demons? Ask all these questions of this foolish monkey.'॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)