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ramayan 5.50.4: इस प्रकार तर्क करते हुए क्रोध से लाल नेत्रों वाले राजा रावण ने मन्त्रीवर प्रहस्त से समयानुसार गम्भीर एवं अर्थपूर्ण बात कही-॥4॥   |   ramayan सर्ग 5.50: रावण का प्रहस्त के द्वारा हनुमान जी से लङ्का में आने का कारण पुछवाना और हनुमान् का अपने को श्रीराम का दूत बताना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 50: रावण का प्रहस्त के द्वारा हनुमान जी से लङ्का में आने का कारण पुछवाना और हनुमान् का अपने को श्रीराम का दूत बताना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.50.4 
स राजा रोषताम्राक्ष: प्रहस्तं मन्त्रिसत्तमम्।
कालयुक्तमुवाचेदं वचो विपुलमर्थवत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार तर्क करते हुए क्रोध से लाल नेत्रों वाले राजा रावण ने मन्त्रीवर प्रहस्त से समयानुसार गम्भीर एवं अर्थपूर्ण बात कही-॥4॥
 
While arguing in this way, King Ravana, with his eyes red with anger, said something serious and meaningful as per the time to Mantrivar Prahastha -॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)