vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 50: रावण का प्रहस्त के द्वारा हनुमान जी से लङ्का में आने का कारण पुछवाना और हनुमान् का अपने को श्रीराम का दूत बताना
»
श्लोक 16-17h
श्लोक
5.50.16-17h
अस्त्रपाशैर्न शक्योऽहं बद्धुं देवासुरैरपि॥ १६॥
पितामहादेष वरो ममापि हि समागत:।
अनुवाद
देवता और दानव भी मुझे शस्त्र या पाश से नहीं बाँध सकते। इसके लिए मुझे ब्रह्माजी से वरदान भी मिला है॥16 1/2॥
‘Even gods and demons cannot bind me with weapons or noose. For this I have also received a boon from Lord Brahma.॥ 16 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×