श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 50: रावण का प्रहस्त के द्वारा हनुमान जी से लङ्का में आने का कारण पुछवाना और हनुमान् का अपने को श्रीराम का दूत बताना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  5.50.16-17h 
अस्त्रपाशैर्न शक्योऽहं बद्धुं देवासुरैरपि॥ १६॥
पितामहादेष वरो ममापि हि समागत:।
 
 
अनुवाद
देवता और दानव भी मुझे शस्त्र या पाश से नहीं बाँध सकते। इसके लिए मुझे ब्रह्माजी से वरदान भी मिला है॥16 1/2॥
 
‘Even gods and demons cannot bind me with weapons or noose. For this I have also received a boon from Lord Brahma.॥ 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)