अथवा यन्निमित्तस्ते प्रवेशो रावणालये।
एवमुक्तो हरिवरस्तदा रक्षोगणेश्वरम्॥ १२॥
अब्रवीन्नास्मि शक्रस्य यमस्य वरुणस्य च।
धनदेन न मे सख्यं विष्णुना नास्मि चोदित:॥ १३॥
अनुवाद
या फिर सब बातें छोड़ दीजिए। रावण की नगरी में आपके आने का क्या प्रयोजन है? यह मुझे बताइए।' प्रहस्त के ऐसा पूछने पर वानरश्रेष्ठ हनुमान ने दैत्यराज रावण से कहा, - 'मैं इंद्र, यम या वरुण का दूत नहीं हूँ। कुबेर से मेरी मित्रता नहीं है और भगवान विष्णु ने मुझे यहाँ नहीं भेजा है।' 12-13.
Or leave aside all other matters. What is the purpose of your coming to Ravana's city? Tell me this.' When Prahast asked this, Hanuman, the best of the monkeys, told Ravana, the lord of demons, - 'I am not the messenger of Indra, Yama or Varuna. I am not friends with Kubera and Lord Vishnu has not sent me here. 12-13.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥