श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 50: रावण का प्रहस्त के द्वारा हनुमान जी से लङ्का में आने का कारण पुछवाना और हनुमान् का अपने को श्रीराम का दूत बताना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.50.10 
विष्णुना प्रेषितो वापि दूतो विजयकाङ्क्षिणा।
नहि ते वानरं तेजो रूपमात्रं तु वानरम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'अथवा विजय चाहनेवाले विष्णु ने तुम्हें अपना दूत बनाकर भेजा है? तुम्हारा तेज वानर के समान नहीं है। केवल तुम्हारा रूप वानर के समान है॥10॥
 
‘Or has Vishnu, who desires victory, sent you as his messenger? Your brilliance is not like that of a monkey. Only your appearance is that of a monkey.॥ 10॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd