श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 50: रावण का प्रहस्त के द्वारा हनुमान जी से लङ्का में आने का कारण पुछवाना और हनुमान् का अपने को श्रीराम का दूत बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.50.1 
तमुद्वीक्ष्य महाबाहु: पिङ्गाक्षं पुरत: स्थितम्।
रोषेण महताऽऽविष्टो रावणो लोकरावण:॥ १॥
 
 
अनुवाद
समस्त लोकों को रुलाने वाला महाबाहु रावण, जब अपने सामने भूरे नेत्रों वाले हनुमान्‌जी को खड़ा देखा, तो अत्यन्त क्रोध से भर गया॥1॥
 
The mighty-armed Ravana, who made all the worlds cry, was filled with great anger when he saw the brown-eyed Hanuman standing before him. ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)