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श्लोक  5.49.6 
शिरोभिर्दशभिर्वीरो भ्राजमानं महौजसम्।
नानाव्यालसमाकीर्णै: शिखरैरिव मन्दरम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वीर हनुमान ने देखा कि दस सिरों से सुशोभित महाबली रावण, नाना प्रकार के सर्पों से युक्त अनेक चोटियों से सुशोभित मंदार पर्वत के समान दिख रहा था।
 
The brave Hanuman saw that the mighty Ravana, adorned with his ten heads, looked like Mount Mandara, adorned with several peaks filled with various kinds of serpents.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)