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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 49: रावण के प्रभावशाली स्वरूप को देखकर हनुमान जी के मन में अनेक प्रकार के विचारों का उठना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.49.4 
महार्हक्षौमसंवीतं रक्तचन्दनरूषितम्।
स्वनुलिप्तं विचित्राभिर्विविधाभिश्च भक्तिभि:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
बहुमूल्य रेशमी वस्त्र उनके शरीर की शोभा बढ़ा रहे थे। वे लाल चंदन से अलंकृत थे और उनका सम्पूर्ण शरीर विविध अनूठी आकृतियों वाले सुन्दर श्रृंगार से सुशोभित था।
 
Precious silken clothes were enhancing the beauty of his body. He was decorated with red sandalwood and his entire body was adorned with beautiful makeup having various unique designs.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)