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ramayan 5.49.18: यदि इसमें महान पाप न होता तो यह राक्षसराज रावण इन्द्रसहित सम्पूर्ण स्वर्गलोक का रक्षक हो सकता था॥18॥   |   ramayan सर्ग 5.49: रावण के प्रभावशाली स्वरूप को देखकर हनुमान जी के मन में अनेक प्रकार के विचारों का उठना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.49.18 
यद्यधर्मो न बलवान् स्यादयं राक्षसेश्वर:।
स्यादयं सुरलोकस्य सशक्रस्यापि रक्षिता॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यदि इसमें महान पाप न होता तो यह राक्षसराज रावण इन्द्रसहित सम्पूर्ण स्वर्गलोक का रक्षक हो सकता था॥18॥
 
Had there not been great sin in this, then this demon king Ravana could have been the protector of the entire heavenly world including Indra.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)