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ramayan 5.49.16: उस महाप्रतापी दैत्यराज को ध्यानपूर्वक देखकर और उनके तेज से मोहित होकर हनुमान्‌जी मन में इस प्रकार विचार करने लगे -॥16॥   |   ramayan सर्ग 5.49: रावण के प्रभावशाली स्वरूप को देखकर हनुमान जी के मन में अनेक प्रकार के विचारों का उठना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 49: रावण के प्रभावशाली स्वरूप को देखकर हनुमान जी के मन में अनेक प्रकार के विचारों का उठना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.49.16 
भ्राजमानं ततो दृष्ट्वा हनुमान् राक्षसेश्वरम्।
मनसा चिन्तयामास तेजसा तस्य मोहित:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उस महाप्रतापी दैत्यराज को ध्यानपूर्वक देखकर और उनके तेज से मोहित होकर हनुमान्‌जी मन में इस प्रकार विचार करने लगे -॥16॥
 
Having seen that illustrious king of demons carefully and being fascinated by his brilliance, Hanuman began to think in his mind as follows -॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)