Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.49.15: यद्यपि हनुमानजी उन भयानक और बलवान राक्षसों से पीड़ित थे, फिर भी वे आश्चर्यचकित होकर राक्षसराज रावण की ओर बड़े ध्यान से देखते रहे॥15॥   |   ramayan सर्ग 5.49: रावण के प्रभावशाली स्वरूप को देखकर हनुमान जी के मन में अनेक प्रकार के विचारों का उठना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 49: रावण के प्रभावशाली स्वरूप को देखकर हनुमान जी के मन में अनेक प्रकार के विचारों का उठना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.49.15 
स तै: सम्पीडॺमानोऽपि रक्षोभिर्भीमविक्रमै:।
विस्मयं परमं गत्वा रक्षोऽधिपमवैक्षत॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि हनुमानजी उन भयानक और बलवान राक्षसों से पीड़ित थे, फिर भी वे आश्चर्यचकित होकर राक्षसराज रावण की ओर बड़े ध्यान से देखते रहे॥15॥
 
Even though he was afflicted by those terrifying and powerful demons, Hanuman remained astonished and continued to gaze at the demon king Ravana with great attention. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)