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ramayan 5.49.13: जैसे देवतागण इन्द्र को सान्त्वना दे रहे थे, वैसे ही मन्त्रों के सार में पारंगत मन्त्रीगण तथा अन्य शुभचिन्तक सचिवगण उन्हें सान्त्वना दे रहे थे ॥13॥   |   ramayan सर्ग 5.49: रावण के प्रभावशाली स्वरूप को देखकर हनुमान जी के मन में अनेक प्रकार के विचारों का उठना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 49: रावण के प्रभावशाली स्वरूप को देखकर हनुमान जी के मन में अनेक प्रकार के विचारों का उठना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.49.13 
मन्त्रिभिर्मन्त्रतत्त्वज्ञैरन्यैश्च शुभदर्शिभि:।
आश्वास्यमानं सचिवै: सुरैरिव सुरेश्वरम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जैसे देवतागण इन्द्र को सान्त्वना दे रहे थे, वैसे ही मन्त्रों के सार में पारंगत मन्त्रीगण तथा अन्य शुभचिन्तक सचिवगण उन्हें सान्त्वना दे रहे थे ॥13॥
 
Just as the gods console Lord Indra, similarly the ministers well versed in the essence of mantras and other well-wishing secretaries were reassuring him. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)