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ramayan 5.48.9: अपनी विशाल सेना का विनाश तथा उस वानर के बल और पराक्रम को देखकर तुम भी अपने बल का विचार करो; फिर अपनी क्षमता के अनुसार प्रयत्न करो॥9॥   |   ramayan सर्ग 5.48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.48.9 
इदं च दृष्ट्वा निहतं महद् बलं
कपे: प्रभावं च पराक्रमं च।
त्वमात्मनश्चापि निरीक्ष्य सारं
कुरुष्व वेगं स्वबलानुरूपम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अपनी विशाल सेना का विनाश तथा उस वानर के बल और पराक्रम को देखकर तुम भी अपने बल का विचार करो; फिर अपनी क्षमता के अनुसार प्रयत्न करो॥9॥
 
Having seen the destruction of your huge army and the might and valour of that monkey, you should also think about your own strength; then make efforts according to your capability.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)