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ramayan 5.48.59: जगत्श्रेष्ठ हनुमान्‌ ने भी जलते हुए सूर्य के समान तेजस्वी और पराक्रमी राक्षसराज रावण को देखा॥59॥   |   ramayan सर्ग 5.48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  5.48.59 
राक्षसाधिपतिं चापि ददर्श कपिसत्तम:।
तेजोबलसमायुक्तं तपन्तमिव भास्करम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
जगत्श्रेष्ठ हनुमान्‌ ने भी जलते हुए सूर्य के समान तेजस्वी और पराक्रमी राक्षसराज रावण को देखा॥59॥
 
Hanuman, the best of the world, also saw the demon king Ravana, as bright and powerful as the burning sun. 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)