Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.48.47: उस समय शत्रु योद्धाओं द्वारा बाँधकर अपमानित करने का ढंग उसे बहुत अच्छा लगा। उसने मन में निश्चयपूर्वक विचार किया था कि ऐसी दशा में राक्षसराज रावण संभवतः कौतूहलवश उसे देखना चाहता होगा (इसीलिए वह यह सब सहन कर रहा था)॥47॥ | ramayan सर्ग 5.48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स रोचयामास परैश्च बन्धं
प्रसह्य वीरैरभिगर्हणं च।
कौतूहलान्मां यदि राक्षसेन्द्रो
द्रष्टुं व्यवस्येदिति निश्चितार्थ:॥ ४७॥
अनुवाद
उस समय शत्रु योद्धाओं द्वारा बाँधकर अपमानित करने का ढंग उसे बहुत अच्छा लगा। उसने मन में निश्चयपूर्वक विचार किया था कि ऐसी दशा में राक्षसराज रावण संभवतः कौतूहलवश उसे देखना चाहता होगा (इसीलिए वह यह सब सहन कर रहा था)॥47॥
At that time he liked the way the enemy warriors tied him up and insulted him. He had definitely thought in his mind that in such a condition, the demon king Ravana would probably want to see him out of curiosity (that is why he was tolerating all this).॥ 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥