श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.48.36 
तत: पैतामहं वीर: सोऽस्त्रमस्त्रविदां वर:।
संदधे सुमहातेजास्तं हरिप्रवरं प्रति॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तब अस्त्र-शस्त्रज्ञों में श्रेष्ठ उस परम तेजस्वी योद्धा ने उन कपिश्रेष्ठों पर लक्ष्य करके ब्रह्माजी द्वारा दिए गए अस्त्र को अपने धनुष पर चढ़ाया॥36॥
 
Then that most brilliant warrior, the best among the weapons experts, aimed at those Kapi Shrestha and adjusted the weapon given by Lord Brahma on his bow. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)