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ramayan 5.48.30: ऊपर जाकर वे महाकपि योद्धा मेघनाद के छोड़े हुए बाणों के बीच से शीघ्रतापूर्वक निकलकर अपने को बचाने लगे। मेघनाद अपने लक्ष्य को निष्फल करने में प्रसिद्ध था।   |   ramayan सर्ग 5.48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.48.30 
शराणामन्तरेष्वाशु व्यावर्तत महाकपि:।
हरिस्तस्याभिलक्ष्यस्य मोक्षयँल्लक्ष्यसंग्रहम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
ऊपर जाकर वे महाकपि योद्धा मेघनाद के छोड़े हुए बाणों के बीच से शीघ्रतापूर्वक निकलकर अपने को बचाने लगे। मेघनाद अपने लक्ष्य को निष्फल करने में प्रसिद्ध था।
 
Going up, those great ape warriors started saving themselves by quickly getting out from between the arrows shot by Meghnad, who was famous for hitting the target, and thus making his aim futile. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)