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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.48.25 
इन्द्रजित् स रथं दिव्यमाश्रितश्चित्रकार्मुक:।
धनुर्विस्फारयामास तडिदूर्जितनि:स्वनम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उस दिव्य रथ पर बैठे हुए, एक विचित्र धनुष से सुसज्जित इंद्रजीत ने अपना धनुष खींचा, जिससे बिजली की गड़गड़ाहट के समान ध्वनि उत्पन्न हुई।
 
Seated on that divine chariot, Indrajit, armed with a strange bow, pulled his bow, which made a sound like the thunder of lightning.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)