श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.48.20 
स तस्य रथनिर्घोषं ज्यास्वनं कार्मुकस्य च।
निशम्य हरिवीरोऽसौ सम्प्रहृष्टतरोऽभवत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
अपने रथ की गड़गड़ाहट और धनुष की गहरी ध्वनि सुनकर वीर वानर हनुमान अत्यंत प्रसन्नता और उत्साह से भर गए।
 
Hearing the rumbling sound of his chariot and the deep sound of the bowstring, the brave monkey Hanuman was filled with great joy and enthusiasm.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)