Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.48.17: उस समय, खिले हुए कमल की पंखुड़ियों के समान विशाल नेत्रों वाला, राक्षसराज रावण का पुत्र, अत्यन्त तेजस्वी इन्द्रजित, उत्सव के दिन उमड़ते हुए समुद्र के समान महान् हर्ष और उत्साह से भरा हुआ, राजमहल से बाहर आया। | ramayan सर्ग 5.48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीमान् पद्मविशालाक्षो राक्षसाधिपते: सुत:।
निर्जगाम महातेजा: समुद्र इव पर्वणि॥ १७॥
अनुवाद
उस समय, खिले हुए कमल की पंखुड़ियों के समान विशाल नेत्रों वाला, राक्षसराज रावण का पुत्र, अत्यन्त तेजस्वी इन्द्रजित, उत्सव के दिन उमड़ते हुए समुद्र के समान महान् हर्ष और उत्साह से भरा हुआ, राजमहल से बाहर आया।
At that time, the extremely illustrious Indrajit, son of the king of demons Ravana, with large eyes like the blooming lotus petals, came out of the royal palace filled with great joy and enthusiasm like the surging sea on the day of the festival.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥