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इति प्रवेगं तु परस्य तर्कयन्
स्वकर्मयोगं च विधाय वीर्यवान्।
चकार वेगं तु महाबलस्तदा
मतिं च चक्रेऽस्य वधे तदानीम्॥ ३०॥
अनुवाद
इस प्रकार शत्रु की प्रचण्डता पर विचार करके तथा उसका प्रतिकार करने का अपना कर्तव्य निश्चित करके, महान बल और पराक्रम से संपन्न हनुमानजी ने उस समय अपनी गति बढ़ा दी और शत्रु का वध करने का विचार किया।
Having thus considered the ferocity of the enemy and having determined his duty to counter him, Hanuman, endowed with great strength and valour, increased his speed at that time and thought of killing the enemy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥