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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.47.22 
तमुत्पतन्तं समभिद्रवद् बली
स राक्षसानां प्रवर: प्रतापवान्।
रथी रथश्रेष्ठतर: किरन् शरै:
पयोधर: शैलमिवाश्मवृष्टिभि:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उन्हें आकाश में उछलते देख, रथ पर सवार वह बलवान, तेजस्वी और महारथी योद्धा बाणों की वर्षा करता हुआ उनका पीछा करने लगा। उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो कोई बादल किसी पर्वत पर ओले और पत्थर बरसा रहा हो।
 
Seeing them jumping in the sky, that strong, glorious and the greatest warrior of all charioteers, riding on a chariot, chased them while showering arrows. At that time it seemed as if a cloud was raining hailstones and stones on a mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)