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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.47.10 
स जातमन्यु: प्रसमीक्ष्य विक्रमं
स्थित: स्थिर: संयति दुर्निवारणम्।
समाहितात्मा हनुमन्तमाहवे
प्रचोदयामास शितै: शरैस्त्रिभि:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हनुमान का पराक्रम देखकर वह क्रोधित हो गया और एकाग्रचित्त होकर युद्ध के लिए योद्धा हनुमान पर तीन तीखे बाण छोड़े।
 
Seeing Hanuman's prowess, he became enraged. So, standing firmly, he concentrated and shot three sharp arrows at Hanuman, who was a warrior, for battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)