| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 46: रावण के पाँच सेनापतियों का वध » श्लोक 1 |
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| | | | श्लोक 5.46.1  | हतान् मन्त्रिसुतान् बुद्ध्वा वानरेण महात्मना।
रावण: संवृताकारश्चकार मतिमुत्तमाम्॥ १॥ | | | | | | अनुवाद | | यह जानकर कि महाबली हनुमान् ने मन्त्रीपुत्रों को भी मार डाला है, रावण भयभीत होकर भी बड़े यत्न से अपना रूप छिपाकर अपनी सद्बुद्धि का आश्रय लेकर आगे की चाल का निश्चय करने लगा॥1॥ | | | | Knowing that the minister's sons were also killed by the great Hanuman, Ravana, though frightened, concealed his form with great effort and, taking recourse to his good wisdom, decided upon his future course of action.॥ 1॥ | | ✨ ai-generated | | |
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