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ramayan 5.45.7: जैसे वर्षा ऋतु में बादल बाणों की वर्षा करते हुए विचरण करते हैं, वैसे ही वे राक्षसरूपी बादल वहाँ बाणों की वर्षा करते हुए विचरण कर रहे थे। रथों की घरघराहट ही उनकी गर्जना थी ॥7॥   |   ramayan सर्ग 5.45: मन्त्री के सात पुत्रों का वध   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 45: मन्त्री के सात पुत्रों का वध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.45.7 
सृजन्तो बाणवृष्टिं ते रथगर्जितनि:स्वना:।
प्रावृट्काल इवाम्भोदा विचेरुर्नैर्ऋताम्बुदा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जैसे वर्षा ऋतु में बादल बाणों की वर्षा करते हुए विचरण करते हैं, वैसे ही वे राक्षसरूपी बादल वहाँ बाणों की वर्षा करते हुए विचरण कर रहे थे। रथों की घरघराहट ही उनकी गर्जना थी ॥7॥
 
Just as clouds move about during the rainy season, raining arrows, similarly those clouds in the form of demons moved about there, raining arrows. The whirring sound of chariots was their roar. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)