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ramayan 5.45.3-4: उनके विशाल रथ, जो घोड़ों द्वारा खींचे जाते थे, सोने की जाली से मढ़े हुए थे। उन पर ध्वजाएँ और पताकाएँ लहरा रही थीं और उनके पहिये बादलों की गर्जना के समान ध्वनि कर रहे थे। ऐसे रथों पर सवार होकर, वे पराक्रमी मंत्री बड़े हर्ष और उत्साह के साथ तपे हुए सोने से रंगे अपने धनुषों की टंकार करते हुए आगे बढ़ रहे थे। उस समय वे सभी बिजली से चमकते बादलों के समान प्रतीत हो रहे थे।   |   ramayan सर्ग 5.45: मन्त्री के सात पुत्रों का वध   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 45: मन्त्री के सात पुत्रों का वध  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  5.45.3-4 
हेमजालपरिक्षिप्तैर्ध्वजवद्भि: पताकिभि:।
तोयदस्वननिर्घोषैर्वाजियुक्तैर्महारथै:॥ ३॥
तप्तकाञ्चनचित्राणि चापान्यमितविक्रमा:।
विस्फारयन्त: संहृष्टास्तडिद्वन्त इवाम्बुदा:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उनके विशाल रथ, जो घोड़ों द्वारा खींचे जाते थे, सोने की जाली से मढ़े हुए थे। उन पर ध्वजाएँ और पताकाएँ लहरा रही थीं और उनके पहिये बादलों की गर्जना के समान ध्वनि कर रहे थे। ऐसे रथों पर सवार होकर, वे पराक्रमी मंत्री बड़े हर्ष और उत्साह के साथ तपे हुए सोने से रंगे अपने धनुषों की टंकार करते हुए आगे बढ़ रहे थे। उस समय वे सभी बिजली से चमकते बादलों के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
Their huge chariots drawn by horses were covered with gold netting. Flags and banners were fluttering on them and the wheels made a sound like the deep roar of the clouds. Riding on such chariots, those mighty ministers moved forward with great joy and enthusiasm, sounding their bows painted with heated gold. At that time, all of them looked like clouds with lightning.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)