Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.42.44: राक्षसों की इतनी बड़ी सेना के मारे जाने की बात सुनकर राक्षसराज रावण बहुत क्रोधित हुआ और उसने प्रहस्त के पुत्र को, जिसका पराक्रम अद्वितीय था और जिसे युद्ध में हराना अत्यंत कठिन था, हनुमान का सामना करने के लिए भेजा। | ramayan सर्ग 5.42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स राक्षसानां निहतं महाबलं
निशम्य राजा परिवृत्तलोचन:।
समादिदेशाप्रतिमं पराक्रमे
प्रहस्तपुत्रं समरे सुदुर्जयम्॥ ४४॥
अनुवाद
राक्षसों की इतनी बड़ी सेना के मारे जाने की बात सुनकर राक्षसराज रावण बहुत क्रोधित हुआ और उसने प्रहस्त के पुत्र को, जिसका पराक्रम अद्वितीय था और जिसे युद्ध में हराना अत्यंत कठिन था, हनुमान का सामना करने के लिए भेजा।
On hearing that such a large army of demons had been killed, the demon king Ravana became very angry and he sent the son of Prahasta, whose valour was unmatched and who was extremely difficult to defeat in battle, to face Hanuman.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे द्विचत्वारिंश: सर्ग:॥ ४२॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें बयालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ४२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥