Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.42.41: पवनपुत्र वीर उस परिघ को लेकर आकाश में विचरण करने लगे। जैसे सहस्र नेत्रों वाले इन्द्र अपने वज्र से दैत्यों का संहार करते हैं, उसी प्रकार उन्होंने उस परिघ से अपने सामने आने वाले समस्त दैत्यों का संहार किया। 41. | ramayan सर्ग 5.42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विचचाराम्बरे वीर: परिगृह्य च मारुति:।
सूदयामास वज्रेण दैत्यानिव सहस्रदृक्॥ ४१॥
अनुवाद
पवनपुत्र वीर उस परिघ को लेकर आकाश में विचरण करने लगे। जैसे सहस्र नेत्रों वाले इन्द्र अपने वज्र से दैत्यों का संहार करते हैं, उसी प्रकार उन्होंने उस परिघ से अपने सामने आने वाले समस्त दैत्यों का संहार किया। 41.
The brave son of Pawan started roaming in the sky with that Parigha. Just as the thousand-eyed Indra kills demons with his thunderbolt, in the same way he killed all the demons who came in front of him with that Parigha. 41.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥