Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.42.38: हनुमान जी ने स्वयं ही अपने स्वामी का नाम लेकर अपना परिचय दिया था, इसलिए राक्षसों को उन्हें पहचानने में कोई संदेह नहीं हुआ। उन्होंने उन पर चारों ओर से आक्रमण किया, तथा नाना प्रकार के भयंकर अस्त्र-शस्त्रों से उन पर आक्रमण किया। 38. | ramayan सर्ग 5.42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हनुमान जी ने स्वयं ही अपने स्वामी का नाम लेकर अपना परिचय दिया था, इसलिए राक्षसों को उन्हें पहचानने में कोई संदेह नहीं हुआ। उन्होंने उन पर चारों ओर से आक्रमण किया, तथा नाना प्रकार के भयंकर अस्त्र-शस्त्रों से उन पर आक्रमण किया। 38.
Hanuman Ji had himself introduced himself by taking his master's name, so the demons had no doubt in recognizing him. They attacked him from all sides, attacking him with various types of dreadful weapons. 38.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥