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ramayan 5.42.37: हनुमान जी की इस गर्जना से सभी राक्षस भय और आतंक से भर गए। सभी ने हनुमान जी को देखा। वे शाम के समय ऊँचे बादल के समान लाल और विशाल दिखाई दे रहे थे। 37.   |   ramayan सर्ग 5.42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.42.37 
तस्य संनादशब्देन तेऽभवन् भयशङ्किता:।
ददृशुश्च हनूमन्तं संध्यामेघमिवोन्नतम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हनुमान जी की इस गर्जना से सभी राक्षस भय और आतंक से भर गए। सभी ने हनुमान जी को देखा। वे शाम के समय ऊँचे बादल के समान लाल और विशाल दिखाई दे रहे थे। 37.
 
This roar of Hanuman ji filled all the demons with fear and terror. They all saw Hanuman ji. He looked red and huge like a high cloud in the evening. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)