श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.42.32 
तस्यास्फोटितशब्देन महता चानुनादिना।
पेतुर्विहङ्गा गगनादुच्चैश्चेदमघोषयत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उनकी पूँछ के फड़फड़ाने की गम्भीर ध्वनि दूर तक गूँजती थी। उससे भयभीत होकर पक्षी आकाश से गिर पड़ते थे। उस समय हनुमान जी ने इस प्रकार ऊँची घोषणा की-॥32॥
 
The deep sound of his tail lashing would echo far away. Frightened by it, birds would fall from the sky. At that time Hanuman Ji made a loud announcement like this -॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)