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ramayan 5.42.27: वन के द्वार पर खड़े वीर वानरों के पास पहुँचकर उन अत्यंत वेगवान रात्रिचर जीवों ने उन पर चारों ओर से आक्रमण कर दिया, मानो पतंगे अग्नि पर आक्रमण कर रहे हों।   |   ramayan सर्ग 5.42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.42.27 
ते कपिं तं समासाद्य तोरणस्थमवस्थितम्।
अभिपेतुर्महावेगा: पतंगा इव पावकम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वन के द्वार पर खड़े वीर वानरों के पास पहुँचकर उन अत्यंत वेगवान रात्रिचर जीवों ने उन पर चारों ओर से आक्रमण कर दिया, मानो पतंगे अग्नि पर आक्रमण कर रहे हों।
 
Reaching the brave monkeys standing at the gate of the forest, those extremely swift night creatures attacked them from all sides, as if moths were attacking a fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)