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ramayan 5.42.22: राक्षसियों के ये शब्द सुनकर राक्षसराज रावण धधकती हुई चिता के समान क्रोध से भर गया। उसकी आँखें क्रोध से घूमने लगीं।   |   ramayan सर्ग 5.42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.42.22 
राक्षसीनां वच: श्रुत्वा रावणो राक्षसेश्वर:।
चिताग्निरिव जज्वाल कोपसंवर्तितेक्षण:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
राक्षसियों के ये शब्द सुनकर राक्षसराज रावण धधकती हुई चिता के समान क्रोध से भर गया। उसकी आँखें क्रोध से घूमने लगीं।
 
On hearing these words of the demonesses, the king of demons Ravana became furious like a blazing pyre. His eyes began to roll with rage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)