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ramayan 5.42.21: हे दैत्यराज! जिन देवी सीता को आपने अपने हृदय में स्थान दिया है, उनसे कौन बात कर सकता है? जिसने अपने प्राणों का मोह नहीं छोड़ा, वह उनसे कैसे बात कर सकता है?॥ 21॥   |   ramayan सर्ग 5.42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.42.21 
मन:परिगृहीतां तां तव रक्षोगणेश्वर।
क: सीतामभिभाषेत यो न स्यात् त्यक्तजीवित:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे दैत्यराज! जिन देवी सीता को आपने अपने हृदय में स्थान दिया है, उनसे कौन बात कर सकता है? जिसने अपने प्राणों का मोह नहीं छोड़ा, वह उनसे कैसे बात कर सकता है?॥ 21॥
 
‘King of demons! Who can talk to Goddess Sita, whom you have given a place in your heart? How can someone who has not given up the attachment to his life talk to her?’॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)