श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.42.19 
चारुपल्लवपत्राढॺं यं सीता स्वयमास्थिता।
प्रवृद्ध: शिंशपावृक्ष: स च तेनाभिरक्षित:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘उसने सुन्दर पत्तों और पत्तियों से युक्त विशाल अशोक वृक्ष को सुरक्षित रखा है, जिसके नीचे सीता रहती हैं।॥19॥
 
‘He has kept safely the huge Ashoka tree, filled with beautiful leaves and foliage, under which Sita lives.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)