Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.42.18: यह निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है कि उन्होंने उस स्थान को जानकी की रक्षा के लिए बचाया था या परिश्रम से थक जाने के कारण। अथवा उन्होंने कौन-सा प्रयत्न किया होगा? उस स्थान को बचाकर उन्होंने सीता की रक्षा की है॥18॥ | ramayan सर्ग 5.42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जानकीरक्षणार्थं वा श्रमाद् वा नोपलक्ष्यते।
अथवा क: श्रमस्तस्य सैव तेनाभिरक्षिता॥ १८॥
अनुवाद
यह निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है कि उन्होंने उस स्थान को जानकी की रक्षा के लिए बचाया था या परिश्रम से थक जाने के कारण। अथवा उन्होंने कौन-सा प्रयत्न किया होगा? उस स्थान को बचाकर उन्होंने सीता की रक्षा की है॥18॥
‘It is not known for sure whether he saved that place to protect Janaki or because he was tired of the effort. Or what effort would he have put in? By saving that place, he has saved Sita.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥