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ramayan 5.42.10: मैं भी उसे देखकर बहुत भयभीत हूँ। मैं नहीं जानता कि वह कौन है। मैं समझता हूँ कि वह कोई राक्षस है जो अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप धारण करके आया है।॥10॥   |   ramayan सर्ग 5.42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.42.10 
अहमप्यतिभीतास्मि नैव जानामि को ह्ययम्।
वेद्मि राक्षसमेवैनं कामरूपिणमागतम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मैं भी उसे देखकर बहुत भयभीत हूँ। मैं नहीं जानता कि वह कौन है। मैं समझता हूँ कि वह कोई राक्षस है जो अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप धारण करके आया है।॥10॥
 
‘I too am very frightened after seeing him. I do not know who he is. I think he is some demon who has come assuming any form as per his wish.’॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)