श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 41: हनुमान जी के द्वारा प्रमदावन (अशोक वाटिका)- का विध्वंस  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.41.9 
तत: समासाद्य रणे दशाननं
समन्त्रिवर्गं सबलं सयायिनम्।
हृदि स्थितं तस्य मतं बलं च
सुखेन मत्वाहमित: पुनर्व्रजे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उस युद्ध में मैं रावण का उसके मन्त्रियों, सेना और सहायकों सहित सामना करके उसके मन की भावना और सैन्यबल को सहज ही जान लूँगा। तत्पश्चात् मैं यहाँ से चला जाऊँगा॥9॥
 
In that war, I will easily find out Ravana's heart's intentions and military strength by facing him along with his ministers, army and assistants. After that, I will leave from here.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)