Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.41.20: उस विशाल वन की भूमि, जो दशमुख रावण की स्त्रियों की रक्षा और अन्तःपुर के मनोरंजन के लिए प्रयुक्त होती थी तथा जहाँ चंचल अशोक लताओं के समूह शोभायमान रहते थे, वानररूपी हनुमान के बल प्रयोग के कारण धन-धान्य से रहित हो गई और दयनीय लताओं से आच्छादित हो गई (उसकी दीन दशा देखकर देखने वालों को दुःख हुआ)। | ramayan सर्ग 5.41: हनुमान जी के द्वारा प्रमदावन (अशोक वाटिका)- का विध्वंस । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सा विह्वलाशोकलताप्रताना
वनस्थली शोकलताप्रताना।
जाता दशास्यप्रमदावनस्य
कपेर्बलाद्धि प्रमदावनस्य॥ २०॥
अनुवाद
उस विशाल वन की भूमि, जो दशमुख रावण की स्त्रियों की रक्षा और अन्तःपुर के मनोरंजन के लिए प्रयुक्त होती थी तथा जहाँ चंचल अशोक लताओं के समूह शोभायमान रहते थे, वानररूपी हनुमान के बल प्रयोग के कारण धन-धान्य से रहित हो गई और दयनीय लताओं से आच्छादित हो गई (उसकी दीन दशा देखकर देखने वालों को दुःख हुआ)।
The land of that vast forest, which was used to protect the women of Dashamukh Ravana and for the recreation of the inner palace and where groups of playful Ashoka creepers used to adorn it, became devoid of wealth due to the use of force by the monkey-like Hanuman and became covered with pitiable creepers (seeing its poor condition the onlookers felt sad).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥