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ramayan 5.40.2: हे वयोवृद्ध वानर! तुमने मुझे बड़ी प्यारी कथा सुनाई है। तुम्हें देखकर मेरा शरीर हर्ष के कारण पुलकित हो रहा है। जैसे वर्षा का जल गिरने पर आधी जमी हुई कृषि भूमि भी हरी-भरी हो जाती है॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 5.40: सीता का श्रीराम से कहने के लिये पुनः संदेश देना तथा हनुमान जी का उन्हें आश्वासन दे उत्तर-दिशा की ओर जाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 40: सीता का श्रीराम से कहने के लिये पुनः संदेश देना तथा हनुमान जी का उन्हें आश्वासन दे उत्तर-दिशा की ओर जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.40.2 
त्वां दृष्ट्वा प्रियवक्तारं सम्प्रहृष्यामि वानर।
अर्धसंजातसस्येव वृष्टिं प्राप्य वसुंधरा॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे वयोवृद्ध वानर! तुमने मुझे बड़ी प्यारी कथा सुनाई है। तुम्हें देखकर मेरा शरीर हर्ष के कारण पुलकित हो रहा है। जैसे वर्षा का जल गिरने पर आधी जमी हुई कृषि भूमि भी हरी-भरी हो जाती है॥ 2॥
 
Veteran monkey! You have told me a very lovely story. Seeing you, my body is filled with excitement due to joy. Just like the half-frozen agricultural land becomes green after the rain water falls.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)