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ramayan 5.40.19-20h: उस उत्तम मणि को लेकर वानरमुख हनुमानजी देवी सीता को सिर नवाकर वहाँ से जाने को तैयार हुए॥19 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.40: सीता का श्रीराम से कहने के लिये पुनः संदेश देना तथा हनुमान जी का उन्हें आश्वासन दे उत्तर-दिशा की ओर जाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 40: सीता का श्रीराम से कहने के लिये पुनः संदेश देना तथा हनुमान जी का उन्हें आश्वासन दे उत्तर-दिशा की ओर जाना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  5.40.19-20h 
स तं मणिवरं गृह्य श्रीमान् प्लवगसत्तम:॥ १९॥
प्रणम्य शिरसा देवीं गमनायोपचक्रमे।
 
 
अनुवाद
उस उत्तम मणि को लेकर वानरमुख हनुमानजी देवी सीता को सिर नवाकर वहाँ से जाने को तैयार हुए॥19 1/2॥
 
Taking that best gem, the monkey-headed Lord Hanuman, after bowing his head to Goddess Sita, got ready to leave from there. 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)