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ramayan 5.40.18-19h: तब सीताजी ने कहा - 'कपिश्रेष्ठ! मैंने तुम्हें उत्तम मान्यता दे दी है। वीर हनुमान! इस आभूषण को ध्यानपूर्वक देखने से तुम्हारी सारी बातें श्री राम को विश्वसनीय लगेंगी।' 18 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.40: सीता का श्रीराम से कहने के लिये पुनः संदेश देना तथा हनुमान जी का उन्हें आश्वासन दे उत्तर-दिशा की ओर जाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 40: सीता का श्रीराम से कहने के लिये पुनः संदेश देना तथा हनुमान जी का उन्हें आश्वासन दे उत्तर-दिशा की ओर जाना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  5.40.18-19h 
साब्रवीद् दत्तमेवाहो मयाभिज्ञानमुत्तमम्।
एतदेव हि रामस्य दृष्ट्वा यत्नेन भूषणम्॥ १८॥
श्रद्धेयं हनुमन् वाक्यं तव वीर भविष्यति।
 
 
अनुवाद
तब सीताजी ने कहा - 'कपिश्रेष्ठ! मैंने तुम्हें उत्तम मान्यता दे दी है। वीर हनुमान! इस आभूषण को ध्यानपूर्वक देखने से तुम्हारी सारी बातें श्री राम को विश्वसनीय लगेंगी।' 18 1/2॥
 
Then Sitaji said – 'Kapishrestha! I have given you the best recognition. Brave Hanuman! By carefully looking at this ornament, all your words will become credible to Shri Ram. 18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)