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ramayan 5.40.11: यह राक्षसराज रावण बड़ा क्रूर है। इसका भी मेरे प्रति अच्छा व्यवहार नहीं है। अब यदि मैं आपकी विलम्ब की बात सुनूँगा तो एक क्षण भी जीवित नहीं रह सकूँगा।॥11॥   |   ramayan सर्ग 5.40: सीता का श्रीराम से कहने के लिये पुनः संदेश देना तथा हनुमान जी का उन्हें आश्वासन दे उत्तर-दिशा की ओर जाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 40: सीता का श्रीराम से कहने के लिये पुनः संदेश देना तथा हनुमान जी का उन्हें आश्वासन दे उत्तर-दिशा की ओर जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.40.11 
घोरो राक्षसराजोऽयं दृष्टिश्च न सुखा मयि।
त्वां च श्रुत्वा विषज्जन्तं न जीवेयमपि क्षणम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
यह राक्षसराज रावण बड़ा क्रूर है। इसका भी मेरे प्रति अच्छा व्यवहार नहीं है। अब यदि मैं आपकी विलम्ब की बात सुनूँगा तो एक क्षण भी जीवित नहीं रह सकूँगा।॥11॥
 
This demon king Ravana is very cruel. He also does not have a good attitude towards me. Now if I hear you delaying then I will not be able to live even for a moment.'॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)