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ramayan 5.40.10: ‘राजकुमार! शत्रुसूदन! मैं एक मास तक किसी प्रकार आपकी प्रतीक्षा करके जीवित रहूँगी। उसके बाद मैं आपके बिना नहीं रह सकूँगी।॥10॥   |   ramayan सर्ग 5.40: सीता का श्रीराम से कहने के लिये पुनः संदेश देना तथा हनुमान जी का उन्हें आश्वासन दे उत्तर-दिशा की ओर जाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.40.10 
धारयिष्यामि मासं तु जीवितं शत्रुसूदन।
मासादूर्ध्वं न जीविष्ये त्वया हीना नृपात्मज॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘राजकुमार! शत्रुसूदन! मैं एक मास तक किसी प्रकार आपकी प्रतीक्षा करके जीवित रहूँगी। उसके बाद मैं आपके बिना नहीं रह सकूँगी।॥10॥
 
‘Prince! Shatrusudan! I will somehow survive for a month waiting for you. After that I will not be able to live without you.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)