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ramayan 5.4.9-10: एक घर से दूसरे घर जाते समय उस कपिश्रेष्ठ ने नाना प्रकार के आकार-प्रकार के भवन देखे और हृदय, कण्ठ और मुख - इन तीनों स्थानों से मंद, मध्यम और उच्च स्वर में सुन्दर गान निकलते सुने ॥9-10॥   |   ramayan सर्ग 5.4: हनुमान जी का लंकापुरी एवं रावण के अन्तःपुर में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 4: हनुमान जी का लंकापुरी एवं रावण के अन्तःपुर में प्रवेश  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  5.4.9-10 
भवनाद् भवनं गच्छन् ददर्श कपिकुञ्जर:॥ ९॥
विविधाकृतिरूपाणि भवनानि ततस्तत:।
शुश्राव रुचिरं गीतं त्रिस्थानस्वरभूषितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
एक घर से दूसरे घर जाते समय उस कपिश्रेष्ठ ने नाना प्रकार के आकार-प्रकार के भवन देखे और हृदय, कण्ठ और मुख - इन तीनों स्थानों से मंद, मध्यम और उच्च स्वर में सुन्दर गान निकलते सुने ॥9-10॥
 
While going from one house to another, that Kaphishreshtha saw buildings of various shapes and sizes and heard beautiful songs emanating from the three places – heart, throat and mouth – in low, medium and high pitch. 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)