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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना
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श्लोक 69
श्लोक
5.38.69
हर्षेण महता युक्त: सीतादर्शनजेन स:।
हृदयेन गतो रामं लक्ष्मणं च सलक्षणम्॥ ६९॥
अनुवाद
सीताजी को देखकर उन्हें बड़ा आनन्द हुआ । उनके मन में मानो भगवान् श्री राम और शुभ लक्ष्मण पहुँच गए थे । वे उन दोनों का चिन्तन करने लगे ॥69॥
He felt great joy after seeing Sitaji. In his mind he had reached Lord Shri Ram and the auspicious Lakshman. Started thinking about both of them. 69॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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