श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  5.38.68 
मणिरत्नं कपिवर: प्रतिगृह्याभिवाद्य च।
सीतां प्रदक्षिणं कृत्वा प्रणत: पार्श्वत: स्थित:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
मणि लेकर महाबली हनुमान ने सीता को प्रणाम किया, उनकी परिक्रमा की और विनम्रतापूर्वक उनके पास खड़े हो गए।
 
Taking the precious stone, the great monkey Hanuman bowed down to Sita, circumambulated her and stood beside her with humility.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)