श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  5.38.63 
त्वमस्मिन् कार्यनिर्वाहे प्रमाणं हरियूथप।
राघवस्त्वत्समारम्भान्मयि यत्नपरो भवेत्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
हे वानरपाल! मैं और क्या कहूँ? जिस उपाय से यह कार्य सिद्ध हो सके, उसे तुम अपनाओ। इस विषय में तुम ही प्रमाण हो - इसका सारा भार तुम पर है। तुम्हारे प्रोत्साहन से ही श्री रघुनाथजी मेरे उद्धार के लिए प्रयत्न कर सकते हैं॥ 63॥
 
‘O monkey-keeper! What more can I say? You must adopt the means by which this task can be accomplished. You are the proof in this matter – the entire burden of this is on you. Only with your encouragement can Shri Raghunathji make efforts for my salvation.॥ 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)