श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.38.6 
श्रोष्यते चैव काकुत्स्थ: सर्वं निरवशेषत:।
चेष्टितं यत् त्वया देवि भाषितं च ममाग्रत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
देवि! तुमने मेरे समक्ष जो-जो पुण्य कर्म किये हैं और जो-जो अच्छी बातें कही हैं, वे सब भगवान राम मुझसे पूर्णतः सुनेंगे॥6॥
 
Devi! Whatever pious deeds you have done in my presence and whatever good things you have said, Lord Rama will hear them all in full from me.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)