श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  5.38.52 
ब्रूहि यद् राघवो वाच्यो लक्ष्मणश्च महाबल:।
सुग्रीवो वापि तेजस्वी हरयो वा समागता:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
अब तुम्हें जो कुछ कहना हो, वह भगवान् राम, पराक्रमी लक्ष्मण, यशस्वी सुग्रीव और वहाँ एकत्रित हुए वानरों से कहो।॥52॥
 
Now say whatever you have to say to Lord Rama, the mighty Lakshmana, the illustrious Sugreeva and the monkeys gathered there.'॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)